Tuesday, June 28, 2016

थमा हुआ क्षण

उनके पहलु से आज जाने का दिल न करे
रात रुक जाए और सुबह का घूंघट न उठे
उनको देखते रहें और वक़्त यों ही थम जाए
और वो थम हुआ क्षण ही बन जाये हयात ||

सुबह की ठंडी ओस की बूँदें

सुबह की ठंडी ओस की बूँदें
जैसे ठंड़ी हों चाँद की शीतल किरणें
ऐसे हो बरसती झर झर बारिश
बंद पलकों पर ठंडी फुवारिश

अब ये मौसम प्यार का मौसम
हम जैसे खो जाते इसमें
और डूबने को तरसते रहते
कैसे प्यार के मौसम बरसे

ठंडी आहें, गरम हैं साँसें
प्यार के दो पल को हम रासे
अब न रुक पाएंगे प्यासे
प्यार के सावन के ये प्यासे

ये सुबह

ये सुबह जाने क्यों अजीब सी है
दिल कुछ भारी भारी है
कहीं कुछ छूट सा गया है
अपना कोई रूठ सा गया है

कैसे समझाऊँ मैं उसको
देखे बिना रह न पाऊँ जिसको
उसके प्यार मैं पगला ऐसे
रांझा, हीर के लिए था जैसे

काश वो भी समझ ये पाती
और मुझसे रूठ न जाती...

ताने

तानों से काम होते तो क़यामत होती
हर ग़ालिब सोता और तानों की आफत होती ||

हयात

हिज्र ऐ दास्ताँ क्या बयान करें तुझको
यों थे वो हयात की जब गए तब हयात ले गये ||

बचपना

ये बचपना नहीं तो और क्या है
छोटी बातों पर चिड़चिड़ाना
यों रूठ के तुम्हारा बेठ जाना
न मुझसे बात करना, न मान जाना

पर न छोड़ना इस बचपने को
किस्मत वालों को मिले है दोबारा
यों रूठना, मनाना, मान के फिर रूठ जाना,
बचपन के खेल, खूब खिलाना

न छोड़ना, न छूटने देना,
न किसी से, न किसी को,
यों ही डूबे रहना इस दुनिया मैं
ये बचपने की सुन्दर दुनिया

न सीमायें यहाँ, न ही मुश्किलें
हर वक़्त है बेवजह, बेफिक्र
मनमौला ये बचपन खेले है खूब
ख्वाबों की दुनिया मैं रहता है डूब

न छोड़ ऐसे बचपन को
रूठ जा, लेकिन,
फिर मान भी जा,
दोबारा रूठ जाने को

इस बचपने को,
सजा के रख,
तुझमें,
और मुझे दिखा कुछ झलकें
कुछ रूठीं हुईँ,
कुछ मनाई हुईँ।।

Love Work

Dont love people, Love your work.
The more you love it, the more it loves you back.
Cant say the same for people!