ये सुबह जाने क्यों अजीब सी है
दिल कुछ भारी भारी है
कहीं कुछ छूट सा गया है
अपना कोई रूठ सा गया है
दिल कुछ भारी भारी है
कहीं कुछ छूट सा गया है
अपना कोई रूठ सा गया है
कैसे समझाऊँ मैं उसको
देखे बिना रह न पाऊँ जिसको
उसके प्यार मैं पगला ऐसे
रांझा, हीर के लिए था जैसे
देखे बिना रह न पाऊँ जिसको
उसके प्यार मैं पगला ऐसे
रांझा, हीर के लिए था जैसे
काश वो भी समझ ये पाती
और मुझसे रूठ न जाती...
और मुझसे रूठ न जाती...
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