सुबह की ठंडी ओस की बूँदें
जैसे ठंड़ी हों चाँद की शीतल किरणें
ऐसे हो बरसती झर झर बारिश
बंद पलकों पर ठंडी फुवारिश
जैसे ठंड़ी हों चाँद की शीतल किरणें
ऐसे हो बरसती झर झर बारिश
बंद पलकों पर ठंडी फुवारिश
अब ये मौसम प्यार का मौसम
हम जैसे खो जाते इसमें
और डूबने को तरसते रहते
कैसे प्यार के मौसम बरसे
हम जैसे खो जाते इसमें
और डूबने को तरसते रहते
कैसे प्यार के मौसम बरसे
ठंडी आहें, गरम हैं साँसें
प्यार के दो पल को हम रासे
अब न रुक पाएंगे प्यासे
प्यार के सावन के ये प्यासे
प्यार के दो पल को हम रासे
अब न रुक पाएंगे प्यासे
प्यार के सावन के ये प्यासे
No comments:
Post a Comment