Wednesday, June 18, 2025

तेरी रौशनी

 तेरी रौशनी के साथ एक सवाल उगता मेरे मन में,

ये जीवन तुझ से है, ऊर्जा है मेरे तन में।


किरणों में लिपटी ये दुनिया चमकती है जो,

असली है या सपना है — बनाया हुआ तेरो?


हर पत्ता, हर कली — तुझसे ही मुस्कराती है,

हर साँस में तेरी ही कोई बात समाती है।

तू दूर है — पर फिर भी सबसे पास,

जैसे आत्मा से जुड़ा कोई उजास।


तू सिखाता है — जलना भी ज़रूरी है,

पर उस जलन में प्रेम और धूरी है।

तेरे बिना सब ठहर सा जाता है,

जीवन ठिठकता है, समय सो जाता है।


तू हर सुबह उम्मीद की चादर लाता है,

अंधेरों को धीरे से हटाता है।

तू डूबता भी है — पर लौटकर आता है,

हर हार में एक नई शुरुआत दिखाता है।


ओ सूरज! तू सिर्फ़ प्रकाश नहीं, एक ज्ञान है,

हर जीव की आँखों में बसा एक गूढ़ प्रस्थान है।

तेरे बिना न दिशा है, न जीवन का गीत,

तू है तो सृष्टि है — तू नहीं तो सब रीत।

No comments:

Post a Comment