Saturday, June 7, 2025

मैं रद्दीवाला हूँ

 मैं रद्दीवाला हूँ, रद्दीवाला हूँ मैं,

टूटी हुई उम्मीदों को समेटता हूँ 

हर बिखरे सपने की किरच मुझे पुकारती है,

मैं उन्हें चुपचाप झोली में भर लेता हूँ।


उदास ख्यालों की गठरी बाँधता हूँ,

ताकि किसी चेहरे पर मुस्कान खिले,

हर आँसू जो चुपचाप गिरा,

मैं उसे लेकर, एक कहानी बुन लेता हूँ।

मैं रद्दीवाला हूँ|


तन्हाई के खाली डिब्बे इकट्ठा करता हूँ,

कि कोई दोस्ती की चाय उसमें उबाल सके,

कुछ पुराने, भूले-बिसरे लम्हे, मैं ले जाता हूँ, ताकि किसी का आज महक सके।

मैं रद्दीवाला हूँ|


निराशा के पन्नों को समेटकर

एक नई उम्मीद की किताब छापता हूँ,

दुखों की खरीद-फरोख्त करता हूँ,

ताकि तुम सुकून में जी सको।

मैं रद्दीवाला हूँ|


उदासी की तहों से लिपटी ख़ामोशियाँ,

जब कोई सुन नहीं पाता,

मैं उन्हें अपनी गाड़ी में भर लेता हूँ 

और उनसे कहानियाँ बनाता हूँ

जो शायद किसी और के ज़ख्म सी देती हैं|

मैं रद्दीवाला हूँ|


मैं तन्हाई को खरीदता हूँ सस्ते में,

कि किसी के जीवन में साथ महंगा न हो जाए।

हर बार जब कोई कहता है 

“अब कुछ नहीं बचा…”

मैं वहीं से शुरुआत करता हूँ।

मैं रद्दीवाला हूँ|


निराशा के धुएँ में से

मैं उम्मीद की चिंगारी तलाशता हूँ।

मैं जानता हूँ, हर निराश ख्याल को सिर्फ़ जगह चाहिए

जहाँ वो पिघल सके,और उसमें से निकल सके

कुछ रोशनी, कुछ राहत।

मैं रद्दीवाला हूँ|


मैं वो हूँ, जो टूटे खिलौनों में बचपन तलाशता है,

पुरानी चिट्ठियों में अधूरे इश्क़ की आहट सुनता है,

और घिसे जूतों में लम्बे सफ़रों की थकान पढ़ता है।

मैं रद्दीवाला हूँ||

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