जो कभी इज़हार न हो वो इश्क़ है
जिसका कभी इंतज़ार न हो वो इश्क़ है
जो लफ़्ज़ों से कह न पाएं वो इश्क़ है
जो इबादत से बढ़ के हो वो इश्क़ है
जो कभी ठहर न पाये वो इश्क़ है
जिसमे आज़माइश न हो वो इश्क़ है
जो आकिबत के पर हो वो इश्क़ है
जो आस के आसीन न हो वो इश्क़ है
जिसका कभी इंतज़ार न हो वो इश्क़ है
जो लफ़्ज़ों से कह न पाएं वो इश्क़ है
जो इबादत से बढ़ के हो वो इश्क़ है
जो कभी ठहर न पाये वो इश्क़ है
जिसमे आज़माइश न हो वो इश्क़ है
जो आकिबत के पर हो वो इश्क़ है
जो आस के आसीन न हो वो इश्क़ है
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