आज दिल कुछ रूठा रूठा है,
जाने क्यों टूटा टूटा है
न उनसे कुछ फरियाद है,
न खुद से कोई शिकवा है
जाने क्यों टूटा टूटा है
न उनसे कुछ फरियाद है,
न खुद से कोई शिकवा है
फिर क्यों ये इतना व्याकुल है,
ग़मगीन विभोर मचलता है
सागर जैसे उठती हो लहरें,
वैसे हिचकोले खाता है
ग़मगीन विभोर मचलता है
सागर जैसे उठती हो लहरें,
वैसे हिचकोले खाता है
न समझ सके न समझा पाये,
न बोल सके न बतला पाये
हम प्यार में इतने व्याकुल थे,
उनको दर्दे दिल दे आये
न बोल सके न बतला पाये
हम प्यार में इतने व्याकुल थे,
उनको दर्दे दिल दे आये
अब क्या बोलों कैसे बोलें,
कैसे अपना हाल बताएं
उनसे हटकर एक पल भी,
ये दिल, न रहता है न रह पाये ||
कैसे अपना हाल बताएं
उनसे हटकर एक पल भी,
ये दिल, न रहता है न रह पाये ||
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