उस शाम की खुशबू है अभी तक,
उन आँखों की गरमी है अभी तक
वो तेरी बातें, वो हिचकिचाना
वो मुझे छूके पीछे हट जाना
उन आँखों की गरमी है अभी तक
वो तेरी बातें, वो हिचकिचाना
वो मुझे छूके पीछे हट जाना
थोडी शरारत, थोडी मासूमियत
और उन अदाओं का रंग बिखरना
याद आते हैं मुझको, उस शाम के हर पल
फिर जी लेते हैं तेरी आँखों से, उस शाम के हर पल||
और उन अदाओं का रंग बिखरना
याद आते हैं मुझको, उस शाम के हर पल
फिर जी लेते हैं तेरी आँखों से, उस शाम के हर पल||
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