Saturday, May 21, 2016

ख्यालों की ख़ामोशी

यह दिल ऐ बयान है आशिक़ और महबूबा के बीच 

आशिक़ कहता है:

कमज़ोर है ये दिल, आशिक़ाना है
बेबाक हद के बाहर, दीवाना है
न समझता है, न ठहरता है
उसके प्यार का अफ़साना है

न फ़िक्र कर न इल्म कर
न इश्क़ ऐ वज़ूद की ख्वाइश
बेपाक मोहब्बत करता जा
न कोई प्यार की नुमईश

दर्द तो होगा, सेहता जा,
ज़हर भी दो घूँट पीता जा
हर वक़्त उसके ख्यालों में,
ऐ खुशामदीद तू जीता जा ||

जवाब मिलता है:

ख्यालों की ख़ामोशी क्यों है 
जब रूबरू खुद अफ़साना है 
इश्क़ की नुमाइश से हिचकिचाहट क्यों है 
जब तसव्वुर में खुद दीवाना है 
कह दो न ये कश्मकश क्यों है 
जब इश्क़ खुद आमादा है 
बस एक बार खुद को बेरोक छोडो 
फिर देखो क्या नज़राना है ||

फिर आशिक़ जवाब देता है :

बेरोक छोड़ा जो खुद को तो क़यामत होगी 
पूरी दुनिया से रूबरू मोहब्बत रुस्वा होगी 
यूँ तो एलाने इश्क़ कर दें हम बेहिचक 
आपकी आँखों की मासूमियत है हमें रोकती

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