आज तेरे दिल से कुछ पुछा था मैंने
कैसे सहते हो तुम इतना दर्द
वो हस पड़ा और बोला,
ये दर्द ही तो है, जो मेरा साथी है
मेरे होने का परिभाषि,
मेरे वजूद का साक्षी और
मेरी धड़कन का वासी है||
कैसे सहते हो तुम इतना दर्द
वो हस पड़ा और बोला,
ये दर्द ही तो है, जो मेरा साथी है
मेरे होने का परिभाषि,
मेरे वजूद का साक्षी और
मेरी धड़कन का वासी है||
No comments:
Post a Comment