आज अपने आप से कुछ गुफ्तगू की
यों दिल भर आया, कुछ आरज़ू की
फिर आब ऐ तलख की ख्वाइश की
इस समां ऐ अकसर की जुस्तजू की
यों दिल भर आया, कुछ आरज़ू की
फिर आब ऐ तलख की ख्वाइश की
इस समां ऐ अकसर की जुस्तजू की
यूँ हैरान हुए खुद ऐ अश्फ़ाक़ पर
क्या अब यकीन हुआ अपने आप पर
इस दुनिया के असीर अब न बन पाएंगे
अस्हाब इस दिल के हम खुदी हैं||
क्या अब यकीन हुआ अपने आप पर
इस दुनिया के असीर अब न बन पाएंगे
अस्हाब इस दिल के हम खुदी हैं||
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