साल गुज़र गए पर मसले वही हैं
उम्मीदों के शिखर फिर भी खड़े यहीं हैं
थम कर बोला वक़्त, कि समय सही है
सुलझा लो ये मसले, कि गिले शिकवे नहीं हैं||
उम्मीदों के शिखर फिर भी खड़े यहीं हैं
थम कर बोला वक़्त, कि समय सही है
सुलझा लो ये मसले, कि गिले शिकवे नहीं हैं||
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