Sunday, May 22, 2016

फिर एक शाम

फिर एक शाम ने दस्तक दी,
दिल ने उमंगों की उड़ान सी ली
वही था जाम वही थी साकी
फिर उसी तरह दिल से उम्मीद थी जागी

दिल के किसी टुकड़े ने अंगराई ली
आज फिर वही शाम है, एक आगाज़ दी
कुछ पल हैं तेरे पास, आज जी ले इन्हें
वही साकी से वही जाम, फिर पी ले इन्हें||

No comments:

Post a Comment