ये बातचीत है दो मित्रों के बीच जो प्यार के सैलाब मैं फंसे हुए हैं...
कुछ सवाल हैं कुछ जवाब हैं... दोनों मित्र सवालों के जवाब ढून्ढ रहे हैं |
1:
तेरे होंठो की लाली कुछ कहती है मुझ से,
कितने सवाल बसें हें तेरे मन में
कुछ के जवाब में तुझे दूंगा और
कुछ के जवाब छुपे हें तेरे दिल में||
कितने सवाल बसें हें तेरे मन में
कुछ के जवाब में तुझे दूंगा और
कुछ के जवाब छुपे हें तेरे दिल में||
2:
सवाल जवाब में देखना तारीखें न बीत जाएँ
तारीखों के बाद चंद सवाल न बदल जाएँ
जो कुछ है, कह दो आज
मेरे जवाबों के फ़लसफ़े कहीं इंतज़ार न बन जाएँ||
जो कुछ है, कह दो आज
मेरे जवाबों के फ़लसफ़े कहीं इंतज़ार न बन जाएँ||
1:
न सवाल हों न जवाब हों
तारीखें तभ भी बदलेंगी
कुछ तारीखोें के इंतज़ार में तारीखें और भी बदलेंगी
कुछ हम जवाब देंगे कुछ तुम सवाल कर लेना
दिल की हर तारीख का हिसाब तुम कर लेना||
तारीखें तभ भी बदलेंगी
कुछ तारीखोें के इंतज़ार में तारीखें और भी बदलेंगी
कुछ हम जवाब देंगे कुछ तुम सवाल कर लेना
दिल की हर तारीख का हिसाब तुम कर लेना||
2:
क्योंकर मोहताजी है सवाल फिर जवाब की
क्यों नहीं बेपनाही थोड़े इश्क़ थोड़े सरफ़राज़ की
न इंतज़ार हो, न उम्मीद,न रश्क़, न मायूसी
क्यों नहीं इस बार आज़ादी सिर्फ दीदार की||
क्यों नहीं बेपनाही थोड़े इश्क़ थोड़े सरफ़राज़ की
न इंतज़ार हो, न उम्मीद,न रश्क़, न मायूसी
क्यों नहीं इस बार आज़ादी सिर्फ दीदार की||
1:
बेपनाह इश्क़ हे, हे बेखुदी दीदार की
सब हदें टूट गयीं, बेसब्र प्यार की
ऑखें बैठी इंतज़ार में, उम्मीद उमड़ पड़ी है
मायूसी इसे न कहना, यह इबादत है यार की||
सब हदें टूट गयीं, बेसब्र प्यार की
ऑखें बैठी इंतज़ार में, उम्मीद उमड़ पड़ी है
मायूसी इसे न कहना, यह इबादत है यार की||
2:
इबादत कब इबारत में बदल जाये,
होश नहीं रहता अब तो इफ़्तार हो, इंतज़ार बहुत हुआ||
होश नहीं रहता अब तो इफ़्तार हो, इंतज़ार बहुत हुआ||
1:
यह इबारते इबादत ही तो हे
हर शब्द तेरीे तारीफे नोश हे
यों तो लब्जों की इफ़्रात हे
पर इन्तिख़ाब एक इम्तिहान हे||
हर शब्द तेरीे तारीफे नोश हे
यों तो लब्जों की इफ़्रात हे
पर इन्तिख़ाब एक इम्तिहान हे||
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