पिछले कुछ दिनै से क्या हो गया
ऐक अनजान चेहरे का अरमान हो गया
मैं मजबूर हूँ या नादान सही
ऑंखें ढूँढती अब सूरत वही
ऐक अनजान चेहरे का अरमान हो गया
मैं मजबूर हूँ या नादान सही
ऑंखें ढूँढती अब सूरत वही
रेशमी जुल्फों की परछाईंया
सुरमई ऑंखें जो उठती नहीं
होठों का कम्पन देखो तो
प्यार कर बैठें तुझे वहीं
अरमान यही फरमान यही
एक बार फिर मिल जा कहीं
तेरे सिवा न भाए कोई
एक बार फिर मिल जा कहीं||
सुरमई ऑंखें जो उठती नहीं
होठों का कम्पन देखो तो
प्यार कर बैठें तुझे वहीं
अरमान यही फरमान यही
एक बार फिर मिल जा कहीं
तेरे सिवा न भाए कोई
एक बार फिर मिल जा कहीं||
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